
16 अगस्त 2025 को सिक्किम के ताडोंग में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धार्मिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।
ताडोंग दुर्गा मंदिर कृष्ण जन्माष्टमी समिति द्वारा आयोजित भव्य कलश यात्रा ने त्योहार की शुरुआत को आध्यात्मिक रंगों से भर दिया।
कलश यात्रा 5वें माइल स्थित सरस्वती मंदिर से आरंभ होकर ताडोंग दुर्गा मंदिर तक पहुँची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जो श्रीकृष्ण के भजनों, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के साथ यात्रा में सम्मिलित हुई।
हर उम्र में दिखा भक्ति भाव: बच्चे, महिलाएं, बुज़ुर्ग सभी शामिल
यात्रा में महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर, बच्चे और पुरुष भगवा वस्त्रों में राधा-कृष्ण के जयघोष करते हुए ताडोंग की गलियों को मथुरा की गलियों में बदल दिया।
स्थानीय लोग भी घरों के बाहर खड़े होकर कलश यात्रा के दर्शन कर रहे थे, मानो भगवान कृष्ण खुद ताडोंग आ गए हों।
ताडोंग की सड़कों पर दिखा ‘भक्ति का ट्रैफिक जाम’
जहां एक ओर देश के दूसरे हिस्सों में ट्रैफिक से सिर दुखता है, वहीं ताडोंग की सड़कों पर हुआ ‘भक्ति ट्रैफिक जाम’, जिसमें वाहन नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब बह रहा था।
घंटों तक सड़कें जय श्रीकृष्ण के नारों से गूंजती रहीं, और हर मोड़ पर लगा था भोग और प्रसाद का स्टॉल।
मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग की शुभकामनाएं
इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने राज्यवासियों को जन्माष्टमी की बधाई दी। उन्होंने कहा:
“जन्माष्टमी केवल उत्सव नहीं, बल्कि धर्म, करुणा और सत्य के शाश्वत मूल्यों की याद दिलाने वाला पर्व है।
श्रीकृष्ण की शिक्षाएँ आज भी मानवता के लिए एक मार्गदर्शक हैं।”
उन्होंने यह भी आग्रह किया कि हम सभी को इस पर्व से प्रेरणा लेकर निस्वार्थ सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलना चाहिए।
मंदिर में आगे क्या होगा?
कलश यात्रा के बाद, ताडोंग दुर्गा मंदिर में दो दिवसीय जन्माष्टमी उत्सव की शुरुआत हुई है। इसमें:
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रात्रि जागरण
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कृष्ण लीला नाट्य मंचन

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दही हांडी प्रतियोगिता
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और रासलीला जैसे कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है।
श्रद्धालु रातभर कृष्ण जन्म की प्रतीक्षा करेंगे और मध्यरात्रि को आरती के साथ भगवान का जन्मोत्सव मनाएंगे।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई झलकियाँ
Instagram, Facebook और YouTube पर #TadongJanmashtami ट्रेंड कर रहा है। भक्तों की लाइव स्ट्रीमिंग, reels और भजन संध्याओं की वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं।
एक स्थानीय यूज़र ने पोस्ट किया:
“जब श्रीकृष्ण ताडोंग आए, तो सड़कें भी थिरक उठीं!”
भक्ति, संस्कृति और सामूहिकता का संगम
ताडोंग की जन्माष्टमी 2025 सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और समुदाय के मिलन का उत्सव बनकर सामने आई है।
जैसे-जैसे आधी रात नज़दीक आएगी, पूरा ताडोंग श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में डूब जाएगा।
“रंग बिरंगी पोशाकें, सिर पर कलश और दिलों में श्रीकृष्ण – यही है सच्ची जन्माष्टमी!”
